एक रोज़ उनके दरवाज़े की कुंडी में गुलाब छोड़ कर आय

एक रोज़ उनके दरवाज़े की कुंडी में गुलाब छोड़ कर आये थे
जब हमने हफ्ते भर उनकी गली के बेहद चक्कर लगाये थे
एक तूफान ने उस गुलाब को कुंडी हटा कर रास्ते पर फेंका
हमने अपने मेहबूब को ही वो गुलाब पैरों से मसलते देखा

Rajat Akela Dil

वो खिड़की अब खुलती ही नही जिसमे मेरा चाँद दिखता था

वो खिड़की अब खुलती ही नही जिसमे मेरा चाँद दिखता था !
वो बाज़ार अब नही लगता जिसमे चाँद का ताज़ बिकता था !!
उस तवायफ ने भी नाचना छोड़ दिया वजह पूछी गयी तो
बोली
वो शख्स ही अब नही आता जो सिर्फ मेरे लिए बहकता था !!

Rajat Akela Dil

समझ न सके उन्हें हम क्योकि इश्क़ के नशे में चूर थे

समझ न सके उन्हें हम क्योकि इश्क़ के नशे में चूर थे
जान लुटाते थे जिस पर वो दिल तोड़ने के लिए मशहूर थे
खुशी से दिल तोड़ दिया एक रोज़ उन्होंने मेरा खेल खेल में
माथे हाथ फेरते हुए बोले यार हम तो आदत से मजबूर थे

Rajat Akela Dil
https://www.facebook.com/rajatakeladil29

जिस रोज़ तेरे चाहने वालो को तू बेहद बुरी लगेगी !

जिस रोज़ तेरे चाहने वालो को तू बेहद बुरी लगेगी !
यकीनन उस दिन भी तू हमें बेहद खूबसूरत लगेगी !!
यूँ तो अक्सर गली में महफ़िल रोज़ ही सजती है !
लेकिन उस दिन हर एक महफ़िल तेरे नाम से सजेगी !!

Rajat Akela Dil

Don't have an account? Sign up

Forgot your password?

Error message here!

Error message here!

Hide Error message here!

Error message here!

OR
OR

Lost your password? Please enter your email address. You will receive a link to create a new password.

Error message here!

Back to log-in

Close