अलग होने पे आमादा हुआ है

अलग होने पे आमादा हुआ है
यक़ीनन दुख बहुत ज़ियादा हुआ है

बिछड़ कर बाग़ से भँवरे ने पूछा
ये गुल क्यों सूख कर काँटा हुआ है

परिंदे को ख़बर पहुँचाऊँ कैसे
शजर में जाल इक डाला हुआ है

मैं केवल रूह छू पाऊँगा उस की
यही शुरूआ'त में वा'दा हुआ है

महज़ क़स्में वो खाए जा रहा है
बदन पर झूट को लादा हुआ है

मोहब्बत का यही हासिल रहा है
मोहब्बत करके पछतावा हुआ है
Om Awasthi

जिस पे तेरा करम यार है।

जिस पे तेरा करम यार है।
फिर कहाँ उस को ग़म यार है।

हर घङी तू ने हर हाल में।
मेरा रक्खा भरम यार है।

मंजिले-इश्क़ में राहबर।
तेरा नक़्शे क़दम यार है।

शोहरतेंजो हैं हासिल मुझे।
'सब ये तेरा करम यार है।'

पी के अमृत नज़र से तिरी।
बेअसर मुझ पे सम यार है।

कैसे तेरा क़सीदा लिखूँ।
मेरा आजिज़ क़लम यार है।

तेरी चौखट का जो है गदा।
वो गदा मोहतरम यार है।

नाम लब पर है जब से तिरा।
दूर हर एक ग़म यार है।

ज़ाकिरों में है तेरे,क़मर।
ये करम कोई कम यार है।

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