लफ्ज़ो से कह नहीं सकता ये बात बहोत गंभीर है

लफ्ज़ो से कह नहीं सकता ये बात बहोत गंभीर है
उसकी गली के बाहर उसकी पहचान का फकीर है
फकीर का दर्द उसका मेहबूब भी समझ ना सका
उस फकीर का मेहबूब भी कितना बेरहम बे-पीर है

मेरी बहोत सी खुशनुमा शामें बहोत पीछे छूट गई

मेरी बहोत सी खुशनुमा शामें बहोत पीछे छूट गई
उस दौर से जुड़ी हर एक डोर भी अब टूट गई !
हर दिन खामोशी से गुजर जाता है पर अंदर शोर होता है
जान कर खुद के दिल को दिखाया मैंने इसलिए खुशियां रूठ गई !!

Rajat Akela Dil

विदा करा कर लाये थे उन्हें तब खुशियो बेसुमार आई थी

विदा करा कर लाये थे उन्हें तब खुशियो बेसुमार आई थी
कभी दूर न होंगे ये बात कंधे पर सिर रख कर बताई थी
कही भी जाने से पहले तुमने मुझसे हर बार पूछा
मुझसे दूर दूसरी दुनिया मे चले जाओगे ये बात क्यों छुपाई थी

Rajat Akela Dil

Agr rakh sako to ek nishani hu mai

Agr rakh sako to ek nishani hu mai,
kho do to sirf ek kahani hu mai,
rok paye na jisko ye sari duniya,
vo ek boond aankh ka pani hu mai,
sbko pyar dene ki aadt h mujhe,
apni alg pehchan bnane ki aadt h mujhe,
kitna b pyara jkhm de koi,
utna hi jyada muskurane ki aadt h mujhe

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