एक समाँ

By ishrat-rahmaniJanuary 4, 2024
बहती है पुर्वा मतवाली
झूम रही है डाली डाली
डाल रहा है सूरज डोरे
झलक रहे हैं ताल कटोरे


झूम रही है डाली डाली
बहती है पुर्वा मतवाली
बंसी कोई बजाता बन में
दौड़ रही बिजली जीवन में


जिस को देखो वो मुस्काए
पड़ा हुआ जैसे कुछ पाए
राग सुनाए कोयल काली
झूम रही है डाली डाली


बहती है पुर्वा मतवाली
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