प्रेम सवेरा

By naseem-amrohviJanuary 4, 2024
चमक चमक कर सूरज उभरा छाया प्रेम सवेरा
मैं ने देखा रूप निराला दिल में अपने तेरा
शाम की चिड़ियाँ पँख पसारे गीत सुनाती आएँ
साँझ पड़े नदियाँ भी रुक कर शोर मचाती आएँ


बालम तेरी चौखट पर है मेरा रैन-बसेरा
चमक चमक कर सूरज उभरा छाया प्रेम सवेरा
मैं ने देखा रूप निराला दिल में अपने तेरा
ये दिन और ये रात का चक्कर ये जीना ये मरना


ये मंदिर मस्जिद ये शिवाले क्या क्या क़िस्से करना
प्यारे तेरी सिमरन जपना धर्म है अब तो मेरा
चमक चमक कर सूरज उभरा छाया प्रेम सवेरा
मैं ने देखा रूप निराला दिल में अपने तेरा


छोटा सा इक बीज ज़मीं में क्या क्या रंग दिखाए
उभरे फूटे फूल खिलाए दुनिया को महकाए
दुनिया तू ने मुझ से बसाई बाग़ हूँ मैं भी तेरा
चमक चमक कर सूरज उभरा छाया प्रेम सवेरा


मैं ने देखा रूप निराला दिल में अपने तेरा
मेरा प्यारा मेरे तन में जल्वे दिल के अंदर
किस को ढूँडूँ किस को देखूँ मन है ख़ुद इक मंदर
इस मंदिर में वो है हर-सू उस का इक मैं डेरा


चमक चमक कर सूरज उभरा छाया प्रेम सवेरा
मैं ने देखा रूप निराला अपने दिल में तेरा
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