ये ज़िंदगी के क़ाफ़िले चले हैं इक क़तार में

By unknownJanuary 4, 2024
ये ज़िंदगी के क़ाफ़िले चले हैं इक क़तार में
है इक के पीछे एक है इक के पीछे एक
रवाँ-दवाँ रवाँ-दवाँ चले हैं इक क़तार में
जो सो गए वो खो गए


जो चल पड़े वो पा गए
ये जगत का है चलन
चले चलो चले चलो
ये ज़िंदगी के क़ाफ़िले चले हैं इक क़तार में


है इक के पीछे एक है इक के पीछे एक
रवाँ-दवाँ रवाँ-दवाँ चले हैं इक क़तार में
न पस्त हिम्मतें करो
न ऊँच-नीच से डरो


हवाएँ भी हैं गामज़न
बढ़े चलो बढ़े चलो
ये ज़िंदगी के क़ाफ़िले चले हैं इक क़तार में
है इक के पीछे एक है इक के पीछे एक


रवाँ-दवाँ रवाँ-दवाँ चले हैं इक क़तार में
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