आबला-पाई का नशा न गया

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
आबला-पाई का नशा न गया
हम से सब की तरह चला न गया
ग़म तो ये है तिरी सदा पर भी
मैं कभी दौड़ता हुआ न गया


तुम ने आज़ाद कर दिया जिस को
उस परिंदे से फिर उड़ा न गया
अश्क देते रहे ख़तों का जवाब
नामा-बर से मगर लिखा न गया


वो जो ख़ामोशियों ने लिक्खा था
वो फ़साना कभी कहा न गया
इक फ़रिश्ता बुला रहा था मुझे
तेरी दहलीज़ से उठा न गया


रस्म वो भी हमीं ने पूरी की
तुम से बर्बाद भी किया न गया
26454 viewsghazalHindi