आज फिर दर्द है एहसास है तन्हाई है

By atif-raisJanuary 2, 2024
आज फिर दर्द है एहसास है तन्हाई है
और ऐसे में तिरी याद चली आई है
और अब प्यार को तुम कोसते फिरते क्यों हो
मैं न कहता था मिरे दोस्त वहाँ खाई है


फूल हैं या ये तिरे लब हैं खिले शाख़ों पर
शाख़ का ख़म है कि जैसे तिरी अंगड़ाई है
ऐसा लगता है ये वीरानी है साथी मेरी
ऐसा लगता है ये सन्नाटा मिरा भाई है


उस की ख़ातिर मिरी धड़कन भी हुई बे-क़ाबू
एक लड़की जो मिरे नाम पे शर्माई है
तेरी सूरत ने भरा रंग मिरे लम्हों में
तेरी बातों ने मिरी शाम ये महकाई है


वापसी का कोई रस्ता नहीं मिलता 'आतिफ़'
ज़िंदगी जाने ये किस मोड़ मुझे लाई है
82937 viewsghazalHindi