'आम सा इक शख़्स है ये 'फ़रहत-एहसास' आप का

By farhat-ehsasFebruary 6, 2024
'आम सा इक शख़्स है ये 'फ़रहत-एहसास' आप का
'इश्क़ ने इस को बनाया है मगर ख़ास आप का
आप तन्हाई में कब मिलते हैं कुछ तो बोलिए
ख़त्म कब होता है आईने में इजलास आप का


और कितना पास आऊँ मैं कि पास आ जाएँ आप
कुछ तो कहिए और कितनी दूर है पास आप का
साहिबा हम को गले से भी लगा लीजे कभी
कब तलक क़दमों में ही बैठा रहे दास आप का


गोश्त मेरे जिस्म का तारीक हो जाता है क्यों
शाम आते ही दमक उठता है क्यों मास आप का
वो जो हैं इक जौहरी से ‘फ़रहत-उल्लाह-ख़ान’ हैं
ये लफ़ंगा जो है ये है ‘फ़रहत-एहसास' आप का


84828 viewsghazalHindi