आँगन के दरख़्तों के लिए कुछ भी नहीं है

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
आँगन के दरख़्तों के लिए कुछ भी नहीं है
दुनिया में बुज़ुर्गों के लिए कुछ भी नहीं है
हक़ छीन के लेती है यहाँ चर्ब-ज़बानी
ख़ामोश परिंदों के लिए कुछ भी नहीं है


चढ़ते हुए सूरज की परस्तार है दुनिया
मिट्टी के चराग़ों के लिए कुछ भी नहीं है
हर आतिश-ए-नमरूद को गुलज़ार बनाना
ख़ालिक़ के ख़लीलों के लिए कुछ भी नहीं है


'अय्यार क़लमकारों की ख़ातिर हैं ख़िताबात
ख़ुद्दार अदीबों के लिए कुछ भी नहीं है
मुजरिम को 'अदालत से दिला देना रिहाई
'आलम' ये वकीलों के लिए कुछ भी नहीं है


95245 viewsghazalHindi