आप अगर मेहरबाँ नहीं होते
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
आप अगर मेहरबाँ नहीं होते
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते
चाहे जितने बुलंद हों बादल
ये कभी आसमाँ नहीं होते
जिन के बस में ज़बान रहती है
वो कभी बे-ज़बाँ नहीं होते
जो तमाशे पसंद हैं मुझ को
वो तमाशे यहाँ नहीं होते
दश्त की बात और है वर्ना
क़ैस लैला कहाँ नहीं होते
पेड़ फलदार कट गए जब से
बाग़ में बाग़बाँ नहीं होते
ध्यान रक्खें पुकारने वाले
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते
चाहे जितने बुलंद हों बादल
ये कभी आसमाँ नहीं होते
जिन के बस में ज़बान रहती है
वो कभी बे-ज़बाँ नहीं होते
जो तमाशे पसंद हैं मुझ को
वो तमाशे यहाँ नहीं होते
दश्त की बात और है वर्ना
क़ैस लैला कहाँ नहीं होते
पेड़ फलदार कट गए जब से
बाग़ में बाग़बाँ नहीं होते
ध्यान रक्खें पुकारने वाले
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते
91593 viewsghazal • Hindi