आप के ज़ौक़-ए-सितम का ग़म नहीं
By ustad-azmat-hussain-khanJanuary 5, 2024
आप के ज़ौक़-ए-सितम का ग़म नहीं
हाँ मगर अब ज़िंदगी में दम नहीं
ऐ जफ़ा-ए-दोस्त ये भी कम नहीं
दर्द अब भी है मगर अब ग़म नहीं
इस में पढ़ लेता हूँ तफ़्सीर-ए-हयात
ये मिरा दिल है ये जाम-ए-जम नहीं
आदमी की ख़ुद-फ़रेबी अल-अमान
और अपने दुख भी अब महरम नहीं
इन में शामिल है मिरे दिल की तपिश
अश्क हैं ये क़तरा-ए-शबनम नहीं
तर्क-ए-मय से और भी आया सुरूर
होश भी मदहोशियों से कम नहीं
'मैकश' उन की नर्गिसी आँखों का वार
कितना क़ातिल है अगरचे सम नहीं
हाँ मगर अब ज़िंदगी में दम नहीं
ऐ जफ़ा-ए-दोस्त ये भी कम नहीं
दर्द अब भी है मगर अब ग़म नहीं
इस में पढ़ लेता हूँ तफ़्सीर-ए-हयात
ये मिरा दिल है ये जाम-ए-जम नहीं
आदमी की ख़ुद-फ़रेबी अल-अमान
और अपने दुख भी अब महरम नहीं
इन में शामिल है मिरे दिल की तपिश
अश्क हैं ये क़तरा-ए-शबनम नहीं
तर्क-ए-मय से और भी आया सुरूर
होश भी मदहोशियों से कम नहीं
'मैकश' उन की नर्गिसी आँखों का वार
कितना क़ातिल है अगरचे सम नहीं
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