आप की तवज्जोह से दिल ने ज़िंदगी पाई
By nudrat-inquilabiJanuary 4, 2024
आप की तवज्जोह से दिल ने ज़िंदगी पाई
आप ही को ज़ेबा है दा’वा-ए-मसीहाई
आप के तग़ाफ़ुल ने राह कितनी दिखलाई
आप भी नहीं आए नींद भी नहीं आई
किस मक़ाम पर मेरा ज़ौक़-ए-दीद आया है
ख़ुद ही मैं तमाशा हूँ ख़ुद ही मैं तमाशाई
कौन जाने कब होगा फ़ैसला मोहब्बत का
कब तलक रहे कोई आप का तमन्नाई
सख़्त है ज़मीं लेकिन शे'र कह गया 'नुदरत'
गुल खिला गई क्या क्या उस की ख़ामा-फ़रसाई
आप ही को ज़ेबा है दा’वा-ए-मसीहाई
आप के तग़ाफ़ुल ने राह कितनी दिखलाई
आप भी नहीं आए नींद भी नहीं आई
किस मक़ाम पर मेरा ज़ौक़-ए-दीद आया है
ख़ुद ही मैं तमाशा हूँ ख़ुद ही मैं तमाशाई
कौन जाने कब होगा फ़ैसला मोहब्बत का
कब तलक रहे कोई आप का तमन्नाई
सख़्त है ज़मीं लेकिन शे'र कह गया 'नुदरत'
गुल खिला गई क्या क्या उस की ख़ामा-फ़रसाई
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