आसमानों से जा मिला हूँ मैं

By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
आसमानों से जा मिला हूँ मैं
आओ दफ़ना दो मर चुका हूँ मैं
ग़ौर से देखिए मिरी वहशत
साए साए से डर रहा हूँ मैं


ज़िंदगी अब मुझे इजाज़त दे
देख जीने को मर रहा हूँ मैं
हँसता रहता हूँ इक उमीद पे मैं
ऐसे हँसने पे रो रहा हूँ मैं


कैसे जीतेगा ये जहाँ मुझ से
डर से आगे का मरहला हूँ मैं
दौड़ ले जितना दौड़ सकती है
ज़िंदगी आख़िरी वबा हूँ मैं


सारी सम्तों की देख कर हालत
इक नई सम्त चल पड़ा हूँ मैं
थक गया सुनते सुनते मौत का शोर
इस लिए खुल के जी रहा हूँ मैं


इस क़दर डर है तुम को खोने का
तुम को पाने से डर रहा हूँ मैं
21583 viewsghazalHindi