अब जो देना है मिरे दोस्त मोहब्बत देना
By ahmad-ayazFebruary 24, 2025
अब जो देना है मिरे दोस्त मोहब्बत देना
यूँ भी अच्छा नहीं होता है अज़िय्यत देना
अब तिरी बात कोई मुझ को भली लगती नहीं
छोड़ता क्यों नहीं तू यार नसीहत देना
गर मुझे देना हो इदराक-ए-तग़ज़्ज़ुल का निसाब
मेरे मौला मुझे सौ साल की ख़ल्वत देना
मैं तिरे लुत्फ़-ओ-‘इनायात का हामी तो नहीं
हो सके तो मुझे जाने की इजाज़त देना
रस्म-ए-दीवानगी की एक अदा ये भी है
ज़ख़्म-ए-ताज़ा को न भरने की सुहूलत देना
अब कोई और न यूसुफ़ बने फ़रज़ंद-ए-चाह
बनी-या'क़ूब को थोड़ी सी मुरव्वत देना
'इश्क़ वो क़ैद-ए-मसर्रत है कि हर लम्हा 'अयाज़'
दिल ये कहता है ये ज़ंजीर हटा मत देना
यूँ भी अच्छा नहीं होता है अज़िय्यत देना
अब तिरी बात कोई मुझ को भली लगती नहीं
छोड़ता क्यों नहीं तू यार नसीहत देना
गर मुझे देना हो इदराक-ए-तग़ज़्ज़ुल का निसाब
मेरे मौला मुझे सौ साल की ख़ल्वत देना
मैं तिरे लुत्फ़-ओ-‘इनायात का हामी तो नहीं
हो सके तो मुझे जाने की इजाज़त देना
रस्म-ए-दीवानगी की एक अदा ये भी है
ज़ख़्म-ए-ताज़ा को न भरने की सुहूलत देना
अब कोई और न यूसुफ़ बने फ़रज़ंद-ए-चाह
बनी-या'क़ूब को थोड़ी सी मुरव्वत देना
'इश्क़ वो क़ैद-ए-मसर्रत है कि हर लम्हा 'अयाज़'
दिल ये कहता है ये ज़ंजीर हटा मत देना
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