अब न मैं हूँ न मिरा ग़म है न जाँ बाक़ी है
By nafas-ambalviJanuary 4, 2024
अब न मैं हूँ न मिरा ग़म है न जाँ बाक़ी है
ज़िंदगी बस तिरे होने का गुमाँ बाक़ी है
इतना ख़ुश भी न हो ऐ मुझ को जलाने वाले
देख जल कर भी अभी मुझ में धुआँ बाक़ी है
मेरी मुश्किल कि मैं ख़ुद अपनी ज़बाँ काट चुका
उस को ये डर कि अभी मेरा बयाँ बाक़ी है
कुछ तो इस बार बहारों ने भी ढाए हैं सितम
उस पे ये जब्र कि मौसम में ख़िज़ाँ बाक़ी है
जिस्म के साथ तमन्ना भी गई हसरत भी
अब यहाँ कोई मकीं है न मकाँ बाक़ी है
मुझ को अब पहले सी निस्बत भी नहीं है तुझ से
अब तुझे मुझ से मोहब्बत भी कहाँ बाक़ी है
ज़िंदगी बस तिरे होने का गुमाँ बाक़ी है
इतना ख़ुश भी न हो ऐ मुझ को जलाने वाले
देख जल कर भी अभी मुझ में धुआँ बाक़ी है
मेरी मुश्किल कि मैं ख़ुद अपनी ज़बाँ काट चुका
उस को ये डर कि अभी मेरा बयाँ बाक़ी है
कुछ तो इस बार बहारों ने भी ढाए हैं सितम
उस पे ये जब्र कि मौसम में ख़िज़ाँ बाक़ी है
जिस्म के साथ तमन्ना भी गई हसरत भी
अब यहाँ कोई मकीं है न मकाँ बाक़ी है
मुझ को अब पहले सी निस्बत भी नहीं है तुझ से
अब तुझे मुझ से मोहब्बत भी कहाँ बाक़ी है
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