अब यहीं से ज़वाल है उस का
By shahbaz-talibJanuary 5, 2024
अब यहीं से ज़वाल है उस का
वो ख़ुदा है ख़याल है उस का
उस के जैसी ही धूप है मुझ पर
मेरे जैसा ही हाल है उस का
वो तक़ाज़े करे है तन्हाई
घर में रहना मुहाल है उस का
कोई बुत ही जवाब देगा उसे
काफ़िराना सवाल है उस का
वक़्त-ए-रुख़्सत वो किस क़दर ख़ुश था
और बिछड़ कर जो हाल है उस का
उस बदन को पढ़ो तसल्ली से
मिसरा' मिसरा' कमाल है उस का
वो ख़ुदा है ख़याल है उस का
उस के जैसी ही धूप है मुझ पर
मेरे जैसा ही हाल है उस का
वो तक़ाज़े करे है तन्हाई
घर में रहना मुहाल है उस का
कोई बुत ही जवाब देगा उसे
काफ़िराना सवाल है उस का
वक़्त-ए-रुख़्सत वो किस क़दर ख़ुश था
और बिछड़ कर जो हाल है उस का
उस बदन को पढ़ो तसल्ली से
मिसरा' मिसरा' कमाल है उस का
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