अफ़सोस है कि इतनी सफ़ाई के बा'द भी

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
अफ़सोस है कि इतनी सफ़ाई के बा'द भी
कुछ दाग़ रह गए हैं धुलाई के बा'द भी
दुनिया तिरी लिखाई समझ में न आ सकी
अन-पढ़ रहे हम इतनी पढ़ाई के बा'द भी


डाली थी तुम ने पाँव में ज़ंजीर जिस जगह
बैठे हैं हम वहीं पे रिहाई के बा'द भी
ये हौसला भी 'इश्क़ ने हम को 'अता किया
ज़िंदा हैं देख तेरी जुदाई के बा'द भी


सहरा तिरा मिज़ाज समझना था इस लिए
हम चल रहे हैं आबला-पाई के बा'द भी
दिल को जकड़ के बैठा है ये कौन सा मलाल
हम ख़ुश नहीं हैं तेरी बधाई के बा'द भी


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