अगर कुछ फ़िक्र के लम्हे मयस्सर हो गए होते

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
अगर कुछ फ़िक्र के लम्हे मयस्सर हो गए होते
चराग़ों की तरह हम भी मुनव्वर हो गए होते
अगर मैं ज़िंदगी कुछ दिन भी तेरे साथ रह लेता
तो दुनिया के कई एहसान मुझ पर हो गए होते


तुझे पाने की ख़्वाहिश में गँवा दी ज़िंदगी अपनी
तुझे सोचा अगर होता सुख़नवर हो गए होते
अगर आसान होता ज़िंदगी के दुख छुपा देना
तो फिर अब तक कई क़तरे समुंदर हो गए होते


कुछ ऐसा ख़ौफ़ दिल पर अजनबी चेहरों का था 'नादिर'
सदा देता नहीं कोई तो पत्थर हो गए होते
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