अगर मैं वक़्त से पहले बड़ा नहीं होता
By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
अगर मैं वक़्त से पहले बड़ा नहीं होता
तो ऐसा हाल भी मेरा हुआ नहीं होता
अगर वो आदमी ज़िद पर अड़ा नहीं होता
तो आज जान से अपनी गया नहीं होता
कि जानता हूँ उसे उस से भी ज़ियादा मैं
मुझे ख़बर है उसे जो पता नहीं होता
मिरे बड़ों ने सिखाया मुझे ये बचपन में
बड़ा जो कहता हो ख़ुद को बड़ा नहीं होता
सबक़ जो मिलता है हम को हर एक ठोकर से
किसी किताब में ये सब लिखा नहीं होता
करे जो पीछे बुराई बुरा है शख़्स वही
बुराई मुँह पे करे जो बुरा नहीं होता
वो आस्तीं में तुम्हें 'उम्र-भर मकीं रखता
जो इस तरह से न 'मस'ऊद' को डसा होता
तो ऐसा हाल भी मेरा हुआ नहीं होता
अगर वो आदमी ज़िद पर अड़ा नहीं होता
तो आज जान से अपनी गया नहीं होता
कि जानता हूँ उसे उस से भी ज़ियादा मैं
मुझे ख़बर है उसे जो पता नहीं होता
मिरे बड़ों ने सिखाया मुझे ये बचपन में
बड़ा जो कहता हो ख़ुद को बड़ा नहीं होता
सबक़ जो मिलता है हम को हर एक ठोकर से
किसी किताब में ये सब लिखा नहीं होता
करे जो पीछे बुराई बुरा है शख़्स वही
बुराई मुँह पे करे जो बुरा नहीं होता
वो आस्तीं में तुम्हें 'उम्र-भर मकीं रखता
जो इस तरह से न 'मस'ऊद' को डसा होता
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