अगरचे तेरे करम का कोई शुमार नहीं

By mustafa-adeebJanuary 4, 2024
अगरचे तेरे करम का कोई शुमार नहीं
मगर ये जब्र मुझे ख़ुद पे इख़्तियार नहीं
हुदूद-ए-वक़्त से बाहर निकल के देख लिया
कहाँ कहाँ तिरी क़ुदरत तिरा हिसार नहीं


मैं एक ज़र्रा सही मेरी हैसियत मा'लूम
मैं आदमी तो हूँ उड़ता हुए ग़ुबार नहीं
सभी के बज़्म-ए-तरब में शुमार नाम मगर
प मेरा नाम किसी नाम में शुमार नहीं


ये लग रहा है मुझे रंग-ओ-बू के ज़ीने पर
मैं जिस बहार में हूँ ये कोई बहार नहीं
किसी ने फिर से गिरा दी है ये दर-ओ-दीवार
उठो 'अदीब' यहाँ और इंतिज़ार नहीं


66870 viewsghazalHindi