ऐसा जल-थल तिरे जाने से था मंज़र मेरा

By mohsin-changeziJanuary 4, 2024
ऐसा जल-थल तिरे जाने से था मंज़र मेरा
जैसे अश्कों से बनाया हुआ पैकर मेरा
एक ज़र्रे पे लिखी है मिरे सहरा की कथा
एक ही लहर में सिमटा है समंदर मेरा


जाने पैग़ाम ग़नीमों से मिला था कैसे
डट गया मेरे मुक़ाबिल में ही लश्कर मेरा
मैं उसे ढूँडने निकला था मगर ‘उजलत में
रह गया है कहीं रस्ते में मुक़द्दर मेरा


रख दिया है किसी शीशे की दुकाँ पर 'मोहसिन'
उस ने चेहरा किसी पत्थर पे बना कर मेरा
92180 viewsghazalHindi