ऐसे निकले न दर से काश कोई
By satyawan-satyaJanuary 5, 2024
ऐसे निकले न दर से काश कोई
हो के मेरी तरह हताश कोई
जज़्ब जज़्बात दिल में ऐसे हैं
दश्त में दफ़्न जैसे लाश कोई
कुछ सफ़र इस तरह के होते हैं
जिन की मंज़िल नहीं तलाश कोई
जिस्म में फँस गया परिंदा इक
काट दे रूह का ये पाश कोई
हो के मेरी तरह हताश कोई
जज़्ब जज़्बात दिल में ऐसे हैं
दश्त में दफ़्न जैसे लाश कोई
कुछ सफ़र इस तरह के होते हैं
जिन की मंज़िल नहीं तलाश कोई
जिस्म में फँस गया परिंदा इक
काट दे रूह का ये पाश कोई
46957 viewsghazal • Hindi