अना बेदार होती जा रही है
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
अना बेदार होती जा रही है
वफ़ा दुश्वार होती जा रही है
तुझे तरतीब में कैसे रखें हम
तिरी भर-मार होती जा रही है
हमारा दर्द हावी हो गया है
दवा बीमार होती जा रही है
हिला करती थी नज़रों से जो चिलमन
वो अब दीवार होती जा रही है
तिरी ख़ुशबू जो कश्ती में बसी थी
वो अब पतवार होती जा रही है
टिका रक्खी है इक बहते दिए पर
नज़र उस पार होती जा रही है
धुआँ चिंगारियाँ कोहराम चीख़ें
हवा अख़बार होती जा रही है
वफ़ा दुश्वार होती जा रही है
तुझे तरतीब में कैसे रखें हम
तिरी भर-मार होती जा रही है
हमारा दर्द हावी हो गया है
दवा बीमार होती जा रही है
हिला करती थी नज़रों से जो चिलमन
वो अब दीवार होती जा रही है
तिरी ख़ुशबू जो कश्ती में बसी थी
वो अब पतवार होती जा रही है
टिका रक्खी है इक बहते दिए पर
नज़र उस पार होती जा रही है
धुआँ चिंगारियाँ कोहराम चीख़ें
हवा अख़बार होती जा रही है
93618 viewsghazal • Hindi