अपने ही बाब में नुक़्सान बहुत करते हैं

By mohsin-changeziJanuary 4, 2024
अपने ही बाब में नुक़्सान बहुत करते हैं
मेज़बानी मिरे मेहमान बहुत करते हैं
अश्क ज़ख़्माते हैं किरची की तरह आँखों को
हम तिरी याद में नुक़्सान बहुत करते हैं


नींद में उन के सभी राज़ को इफ़्शा कर के
जागने वालों को हैरान बहुत करते हैं
लौट कर आते नहीं वो कभी आँसू की तरह
लौट आने के जो पैमान बहुत करते हैं


रोज़ मिलते हैं उसी से जो मुक़द्दर में नहीं
हम मुक़द्दर को परेशान बहुत करते हैं
13533 viewsghazalHindi