अपने हिस्से की चालें चलेगा ज़रूर
By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
अपने हिस्से की चालें चलेगा ज़रूर
शौक़ फिर कोई साज़िश करेगा ज़रूर
वो तिजारत जो करते हैं शमशीर की
देखना उन का सर भी कटेगा ज़रूर
क़ैस-ओ-फ़रहाद से अब न ता'बीर कर
दाग़-ए-वहशत जबीं से मिटेगा ज़रूर
मस्लहत जानता है सो चुप है अभी
शौक़ इक दिन तमाशा करेगा ज़रूर
क़ाफ़िले में हर इक फ़र्द मुख़्तार है
क़ाफ़िला देख लेना लुटेगा ज़रूर
शौक़ फिर कोई साज़िश करेगा ज़रूर
वो तिजारत जो करते हैं शमशीर की
देखना उन का सर भी कटेगा ज़रूर
क़ैस-ओ-फ़रहाद से अब न ता'बीर कर
दाग़-ए-वहशत जबीं से मिटेगा ज़रूर
मस्लहत जानता है सो चुप है अभी
शौक़ इक दिन तमाशा करेगा ज़रूर
क़ाफ़िले में हर इक फ़र्द मुख़्तार है
क़ाफ़िला देख लेना लुटेगा ज़रूर
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