अपनी शोहरत का भरम मुझ पे जताने वाला
By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
अपनी शोहरत का भरम मुझ पे जताने वाला
भूल बैठा है उसे मैं हूँ बनाने वाला
वक़्त पड़ता है तो होता नहीं मौजूद कहीं
काम आता ही नहीं बातें बनाने वाला
बाप बनने पे समझ आई हक़ीक़त मुझ को
ख़र्च करता ही नहीं ख़ुद पे कमाने वाला
मैं ने छोड़ा है जिसे दिल से लगा कर अपने
अब नहीं कोई उसे दिल से लगाने वाला
सर से पानी भी गुज़र जाए मगर उफ़ न करे
दोस्ती ऐसे निभाता है निभाने वाला
चोर-दरवाज़ा जो रक्खा है ये बाग़ीचे में
कौन ऐसा है तिरा मिलने मिलाने वाला
भूल बैठा है उसे मैं हूँ बनाने वाला
वक़्त पड़ता है तो होता नहीं मौजूद कहीं
काम आता ही नहीं बातें बनाने वाला
बाप बनने पे समझ आई हक़ीक़त मुझ को
ख़र्च करता ही नहीं ख़ुद पे कमाने वाला
मैं ने छोड़ा है जिसे दिल से लगा कर अपने
अब नहीं कोई उसे दिल से लगाने वाला
सर से पानी भी गुज़र जाए मगर उफ़ न करे
दोस्ती ऐसे निभाता है निभाने वाला
चोर-दरवाज़ा जो रक्खा है ये बाग़ीचे में
कौन ऐसा है तिरा मिलने मिलाने वाला
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