'अज़ीज़ आए मदद को न ग़म-गुसार आए

By javed-vashishtJanuary 3, 2024
'अज़ीज़ आए मदद को न ग़म-गुसार आए
ज़माने-भर को मुसीबत में हम पुकार आए
समझ सकी न ख़िरद जब तिरे इशारे को
जुनूँ-नसीब हमीं थे जो सू-ए-दार आए


मिलेगा तोहफ़ा-ए-दिल के 'एवज़ नशात कि ग़म
किसे ख़बर है कि जीत आए हम कि हार आए
जुनूँ की आबला-पाई से फूल खिलते गए
न जाने कितने बयाबान हम निखार आए


हमारे पास भी कहने को हैं बहुत बातें
मगर कहे का हमारे जो ए'तिबार आए
शिकस्त-ए-जाम पे रोए शिकस्त-ए-दिल पे हँसे
कुछ ऐसे लम्हे भी 'जावेद' हम गुज़ार आए


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