बड़ा कुम्बा है छोटी देगची है
By chand-kakralviJanuary 19, 2024
बड़ा कुम्बा है छोटी देगची है
और उस पर भूक मुँह खोले खड़ी है
जिधर तू हो उधर ही देखती है
हमारी आँख भी सूरज-मुखी है
मिरे मौला अभी सूरज न निकले
कोई तहरीर शबनम लिख रही है
कोई नुस्ख़ा न होगा कारगर अब
मोहब्बत काम अपना कर चुकी है
'इनायत पर किसी की जी रहे हैं
हमारी ज़िंदगी क्या ज़िंदगी है
मिरी दिल-जूई की ख़ातिर किसी ने
दहकती आग दामन में रखी है
ज़मीं में भी उतर जाएगा सूरज
अभी तो बर्फ़ की चादर हटी है
फ़क़त ख़ुशबू नहीं तितली की चाहत
वो फूलों का लहू भी चाटती है
नज़र आता नहीं कुछ भी किसी को
बज़ाहिर रौशनी ही रौशनी है
और उस पर भूक मुँह खोले खड़ी है
जिधर तू हो उधर ही देखती है
हमारी आँख भी सूरज-मुखी है
मिरे मौला अभी सूरज न निकले
कोई तहरीर शबनम लिख रही है
कोई नुस्ख़ा न होगा कारगर अब
मोहब्बत काम अपना कर चुकी है
'इनायत पर किसी की जी रहे हैं
हमारी ज़िंदगी क्या ज़िंदगी है
मिरी दिल-जूई की ख़ातिर किसी ने
दहकती आग दामन में रखी है
ज़मीं में भी उतर जाएगा सूरज
अभी तो बर्फ़ की चादर हटी है
फ़क़त ख़ुशबू नहीं तितली की चाहत
वो फूलों का लहू भी चाटती है
नज़र आता नहीं कुछ भी किसी को
बज़ाहिर रौशनी ही रौशनी है
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