बदल के रुख़ कोई मंज़र रफ़ू किया जाए

By shahbaz-talibJanuary 5, 2024
बदल के रुख़ कोई मंज़र रफ़ू किया जाए
चलो कि ज़ख़्म से ख़ंजर रफ़ू किया जाए
उतार फेंको बदन की हसीन मिट्टी से
वो पैरहन जिसे अक्सर रफ़ू किया जाए


सिपाहियों की निगाहें उलझती रहती हैं
लिबास-ए-साहिब-ए-लश्कर रफ़ू किया जाए
मसीह-ए-'इश्क़ तिरी ये भी ज़िम्मेदारी है
शहीद-ए-हिज्र का बिस्तर रफ़ू किया जाए


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