बदन से मावरा हो कर कोई रिश्ता बना लेगा

By atif-raisJanuary 2, 2024
बदन से मावरा हो कर कोई रिश्ता बना लेगा
उसे मत देखिए वो अपना गिरवीदा बना लेगा
इसे तो बस मिरी आँखों को तर रखने की 'आदत है
ज़रा से ज़ख़्म को ये दिल बहुत गहरा बना लेगा


बढ़ाएगा मिरी क़िस्मत की गलियों में वो तारीकी
फिर अपने आप को कोई सितारा सा बना लेगा
उसे बनने बिगड़ने की ज़रूरत फिर नहीं होगी
कोई भी शख़्स जो ख़ुद को यहाँ तेरा बना लेगा


तिरे रहम-ओ-करम पर मैं ने छोड़ा था मोहब्बत को
मुझे क्यों ऐसा लगता था कि तू रस्ता बना लेगा
जहाँ है झूट की मिट्टी वहीं धोके का कूज़ा भी
न जाने इस से अब ये आदमी क्या क्या बना लेगा


जहाँ तक हो सके तुम से उसे रोको मोहब्बत से
तुम्हारे शहर में वो इक नया फ़िरक़ा बना लेगा
मगर पूरी तरह उस की कहाँ तज्सीम मुमकिन है
कोई आँखें बनाएगा कोई चेहरा बना लेगा


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