बड़ी गहरी ख़मोशी हो गई है
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
बड़ी गहरी ख़मोशी हो गई है
हमारी चीख़ लम्बी हो गई है
वही जीना वही मरना है लेकिन
ज़रा तरतीब उल्टी हो गई है
मुसलसल रहते रहते आप के साथ
मोहब्बत आप जैसी हो गई है
तुम्हारा बैग ख़ाली ही रहेगा
हमारी जेब ख़ाली हो गई है
मिरे अल्फ़ाज़ सस्ते हो गए हैं
तिरी आवाज़ महँगी हो गई है
हमारी चीख़ लम्बी हो गई है
वही जीना वही मरना है लेकिन
ज़रा तरतीब उल्टी हो गई है
मुसलसल रहते रहते आप के साथ
मोहब्बत आप जैसी हो गई है
तुम्हारा बैग ख़ाली ही रहेगा
हमारी जेब ख़ाली हो गई है
मिरे अल्फ़ाज़ सस्ते हो गए हैं
तिरी आवाज़ महँगी हो गई है
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