बदली हुई दुनिया की नज़र देख रही हूँ

By sarahat-ahmad-sarahatJanuary 4, 2024
बदली हुई दुनिया की नज़र देख रही हूँ
देखा नहीं जाता है मगर देख रही हूँ
अश्कों में तलातुम का असर देख रही हूँ
डूबी हुई आँखें हैं मगर देख रही हूँ


मायूस नहीं हूँ मैं अँधेरों से ज़रा भी
हर शाम के पहलू में सहर देख रही हूँ
मंज़िल की कशिश मेरे क़दम खींच रही है
सिमटी हुई हर राहगुज़र देख रही हूँ


जी खोल के शबनम ने लुटाया है ख़ज़ाना
बिखरे हुए गुलशन में गुहर देख रही हूँ
71107 viewsghazalHindi