बहुत ख़ुशी भी अगर हो ख़ुशी नहीं होती

By atif-raisJanuary 2, 2024
बहुत ख़ुशी भी अगर हो ख़ुशी नहीं होती
तुम्हारे बा'द यहाँ ज़िंदगी नहीं होती
अगर ये राह के पत्थर हमें भी रास आते
हमारे चेहरे पे संजीदगी नहीं होती


मैं घुट के मर गया होता तिरी जुदाई में
अगर ये याद की खिड़की खुली नहीं होती
वो माने या नहीं माने ये उस की मर्ज़ी है
उसे बताओ कि अब ख़ुद-कुशी नहीं होती


ज़ियादा देर मुलाक़ात हो भी सकती थी
तुम्हारे पास अगर ये घड़ी नहीं होती
'अजीब लड़की है 'आतिफ़' वफ़ा पे आमादा
कभी वो होती है लेकिन कभी नहीं होती


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