बाक़ी जो लोग हैं कहीं होते
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
बाक़ी जो लोग हैं कहीं होते
शह्र में बस तुम्हीं मकीं होते
रास्ते सब अगर हसीं होते
फ़ासले पैदा ही नहीं होते
हाए वो आसमान भी क्या था
मैं ने देखा जिसे ज़मीं होते
तू ही तू है तिरी कहानी में
काश हम भी कहीं कहीं होते
ये सुतून आँधियों में क्यों गिरते
गर ज़रा और तह-ए-ज़मीं होते
बस में होती जो गर्दिश-ए-दौराँ
तुम जहाँ होते हम वहीं होते
प्यार क्या सिर्फ़ जी-हुज़ूरी है
आप नाराज़ क्यों नहीं होते
फूल इतरा रहे हैं ख़ुश्बू पर
काश तुम भी यहीं कहीं होते
ये भी सच है कि रू-ब-रू तेरे
हम जो होते हैं वो नहीं होते
शह्र में बस तुम्हीं मकीं होते
रास्ते सब अगर हसीं होते
फ़ासले पैदा ही नहीं होते
हाए वो आसमान भी क्या था
मैं ने देखा जिसे ज़मीं होते
तू ही तू है तिरी कहानी में
काश हम भी कहीं कहीं होते
ये सुतून आँधियों में क्यों गिरते
गर ज़रा और तह-ए-ज़मीं होते
बस में होती जो गर्दिश-ए-दौराँ
तुम जहाँ होते हम वहीं होते
प्यार क्या सिर्फ़ जी-हुज़ूरी है
आप नाराज़ क्यों नहीं होते
फूल इतरा रहे हैं ख़ुश्बू पर
काश तुम भी यहीं कहीं होते
ये भी सच है कि रू-ब-रू तेरे
हम जो होते हैं वो नहीं होते
39745 viewsghazal • Hindi