बस एक उन के ही आने का इंतिज़ार हुआ
By shariq-ali-shariqJanuary 5, 2024
बस एक उन के ही आने का इंतिज़ार हुआ
फिर इस के बा'द किसी से हमें न प्यार हुआ
तुम्हारी यादों का ग़म दिल के आर-पार हुआ
था बे-क़रार ये दिल और बे-क़रार हुआ
वो मुझ को छोड़ गए दूसरों के कहने पर
चलो किसी की तो बातों पे ए'तिबार हुआ
तमाम 'उम्र यही बात अब सताएगी
वो प्यार से न मिले या मुझे न प्यार हुआ
किसी की जान गई कोई बन गया क़ैदी
कोई नज़र का कोई ज़ुल्फ़ का शिकार हुआ
है बात कुछ तो तिरी बात में भी ऐ 'शारिक़'
जो उन की बज़्म में तेरा भी इंतिज़ार हुआ
फिर इस के बा'द किसी से हमें न प्यार हुआ
तुम्हारी यादों का ग़म दिल के आर-पार हुआ
था बे-क़रार ये दिल और बे-क़रार हुआ
वो मुझ को छोड़ गए दूसरों के कहने पर
चलो किसी की तो बातों पे ए'तिबार हुआ
तमाम 'उम्र यही बात अब सताएगी
वो प्यार से न मिले या मुझे न प्यार हुआ
किसी की जान गई कोई बन गया क़ैदी
कोई नज़र का कोई ज़ुल्फ़ का शिकार हुआ
है बात कुछ तो तिरी बात में भी ऐ 'शारिक़'
जो उन की बज़्म में तेरा भी इंतिज़ार हुआ
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