बज़्म-ए-‘अज़ा बनी हुई है बज़्म-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़

By rashid-shahjahanpuriJanuary 4, 2024
बज़्म-ए-‘अज़ा बनी हुई है बज़्म-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़
दौर-ए-नशात मोजिब-ए-दौरान-ए-सर है आज
मौक़ूफ़ है लबों की तबस्सुम से रस्म-ओ-राह
आह-ओ-फ़ुग़ाँ वज़ीफ़ा-ए-शाम-ओ-सहर है आज


जब तुम हमारे हो न सके हम नहीं रहे
लो दास्तान-ए-मेहर-ओ-वफ़ा मुख़्तसर है आज
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