बे-रुख़ी है कि तग़ाफ़ुल है सज़ा है क्या है

By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
बे-रुख़ी है कि तग़ाफ़ुल है सज़ा है क्या है
मेहरबाँ ग़ैर पे क्यों इतना हुआ है क्या है
मेरे आने से फ़क़त बज़्म सरासीमा है क्यों
आज महफ़िल में जो इक शोर बपा है क्या है


जाम औक़ात से ज़ाइद नहीं देता है न दे
साक़िया कुछ भी न देने पे तुला है क्या है
'इश्क़ से क़ब्ल न समझा था जो अब समझा हूँ
शैख़ साहिब ने जो इरशाद किया है क्या है


शौक़ कहता था कि सब क़ैद करेगा मंज़र
ताब जलवों की मगर ला न सका है क्या है
नाम ले कर जो सर-ए-बज़्म पुकारा उन को
हर कोई चीख़ उठा बोलिए क्या है क्या है


जंग जारी है मुसलसल मिरे अंदर 'अहमर'
'आजिज़ी है कि तमाशा है अना है क्या है
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