भला अब और कहाँ ज़िंदगी नज़र आए
By abdurrahman-mominJanuary 18, 2024
भला अब और कहाँ ज़िंदगी नज़र आए
तुम्हारे बा'द हमें क्या कोई नज़र आए
तलाश जिस की है बस वो नज़र नहीं आता
ये और बात नज़र को वही नज़र आए
ये होशियार तुझे होशियार समझेंगे
इन्हें कहाँ तिरी दीवानगी नज़र आए
गुज़र तो आए हैं तेरी गली से हम लेकिन
जहाँ भी जाएँ तिरी ही गली नज़र आए
ये रहगुज़र जो मिरे साथ साथ चलती थी
तिरी गली में ठहरती हुई नज़र आए
नज़र गई थी हमारी जब आइने की तरफ़
उसे लगा कि हमें भी हमी नज़र आए
वो तो नहीं था तो फिर कौन साथ था मेरे
कोई तो होगा मगर कब कोई नज़र आए
तुझे दिखाई नहीं दे रही मगर 'मोमिन'
कलाम कर कि तुझे ख़ामुशी नज़र आए
तुम्हारे बा'द हमें क्या कोई नज़र आए
तलाश जिस की है बस वो नज़र नहीं आता
ये और बात नज़र को वही नज़र आए
ये होशियार तुझे होशियार समझेंगे
इन्हें कहाँ तिरी दीवानगी नज़र आए
गुज़र तो आए हैं तेरी गली से हम लेकिन
जहाँ भी जाएँ तिरी ही गली नज़र आए
ये रहगुज़र जो मिरे साथ साथ चलती थी
तिरी गली में ठहरती हुई नज़र आए
नज़र गई थी हमारी जब आइने की तरफ़
उसे लगा कि हमें भी हमी नज़र आए
वो तो नहीं था तो फिर कौन साथ था मेरे
कोई तो होगा मगर कब कोई नज़र आए
तुझे दिखाई नहीं दे रही मगर 'मोमिन'
कलाम कर कि तुझे ख़ामुशी नज़र आए
51728 viewsghazal • Hindi