भीक दीदार की दे दो मुझे दाता बन कर
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
भीक दीदार की दे दो मुझे दाता बन कर
ढूँढती रहती हैं आँखें तुम्हें कासा बन कर
मुझ को रहना था तिरी आँख में आँसू की तरह
मैं तो नाकाम हूँ ऐ दोस्त सितारा बन कर
एक लम्हा जो मोहब्बत का मिला था मुझ को
छा गया ज़ेहन पे मेरे वो ज़माना बन कर
कैसे एहसान उतारूँगा मैं उस जुगनू का
जो अँधेरों में रहा साथ उजाला बन कर
तज़्किरा चाहे किसी का हो चमक आती नहीं
रह गई ज़िंदगी बीमार का चेहरा बन कर
ढूँढती रहती हैं आँखें तुम्हें कासा बन कर
मुझ को रहना था तिरी आँख में आँसू की तरह
मैं तो नाकाम हूँ ऐ दोस्त सितारा बन कर
एक लम्हा जो मोहब्बत का मिला था मुझ को
छा गया ज़ेहन पे मेरे वो ज़माना बन कर
कैसे एहसान उतारूँगा मैं उस जुगनू का
जो अँधेरों में रहा साथ उजाला बन कर
तज़्किरा चाहे किसी का हो चमक आती नहीं
रह गई ज़िंदगी बीमार का चेहरा बन कर
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