चार-सू फैले नज़र आए उजाले मेरे
By hasrat-khan-khatakJanuary 3, 2024
चार-सू फैले नज़र आए उजाले मेरे
कोई आ देखे पड़े पैर के छाले मेरे
मैं समझता हूँ कि मैं कुछ भी नहीं हूँ लेकिन
लोग देते हैं कई बार हवाले मेरे
आँख के लम्स से जिस जिस को छुआ चाँद हुए
दिन के सूरज हुए हाथों से उछाले मेरे
अच्छे यारों ने रखे नाम भी अच्छे मेरे
भाया कह देते हैं या कहते हैं लाले मेरे
दश्त-ए-वहशत में समर-बार नुमू ले आए
ज़र्रा-ए-रेत पे बरसे हुए पाले मेरे
वा-ए-क़िस्मत से मिले तू ने दिए ज़ख़्म हरे
नीले नीले से हुए नीले से काले मेरे
न ही झुकता है न बिकता है न घबराता है
तू ने सब 'ऐब बहुत ख़ूब निकाले मेरे
कोई आए मिरी तुर्बत पे तो मिट्टी की जगह
उन से कहना है कि अफ़्कार सँभाले मेरे
नए उस्लूब नई बात नई तशबीहात
इस्ति'आरे भी बहुत ख़ूब निराले मेरे
कोई आ देखे पड़े पैर के छाले मेरे
मैं समझता हूँ कि मैं कुछ भी नहीं हूँ लेकिन
लोग देते हैं कई बार हवाले मेरे
आँख के लम्स से जिस जिस को छुआ चाँद हुए
दिन के सूरज हुए हाथों से उछाले मेरे
अच्छे यारों ने रखे नाम भी अच्छे मेरे
भाया कह देते हैं या कहते हैं लाले मेरे
दश्त-ए-वहशत में समर-बार नुमू ले आए
ज़र्रा-ए-रेत पे बरसे हुए पाले मेरे
वा-ए-क़िस्मत से मिले तू ने दिए ज़ख़्म हरे
नीले नीले से हुए नीले से काले मेरे
न ही झुकता है न बिकता है न घबराता है
तू ने सब 'ऐब बहुत ख़ूब निकाले मेरे
कोई आए मिरी तुर्बत पे तो मिट्टी की जगह
उन से कहना है कि अफ़्कार सँभाले मेरे
नए उस्लूब नई बात नई तशबीहात
इस्ति'आरे भी बहुत ख़ूब निराले मेरे
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