चलो फ़रार-ए-ख़ुदी का कोई सिला तो मिला
By abhinandan-pandeyMarch 8, 2025
चलो फ़रार-ए-ख़ुदी का कोई सिला तो मिला
हमीं मिले नहीं उस को हमें ख़ुदा तो मिला
नशात-ए-क़र्या-ए-जाँ से जुदा हुई ख़ुश्बू
सफ़र कुछ ऐसा है अब के कोई मिला तो मिला
हमारे बा'द रिवायत चली मोहब्बत की
निज़ाम-ए-आलम-ए-हस्ती को फ़ल्सफ़ा तो मिला
जो छोड़ आए थे तस्कीन-ए-दिल के वास्ते हम
तुम्हें ऐ जान-ए-तमन्ना वो नक़्श-ए-पा तो मिला
सवाल आ गए आँखों से छन के होंटों पर
हमें जवाब न देने का फ़ाएदा तो मिला
ये आह-ओ-गिर्या-ओ-ज़ारी कहीं तो काम आई
हवा-ए-दश्त को पानी का ज़ाइक़ा तो मिला
नमाज़-ए-अस्र नहीं पढ़ सकी मिरी वहशत
जुनून-ए-इश्क़ को मैदान-ए-कर्बला तो मिला
फिर इस के बा'द बरामद न हो सका कुछ भी
हमारे आँख में जलता हुआ दिया तो मिला
हमीं मिले नहीं उस को हमें ख़ुदा तो मिला
नशात-ए-क़र्या-ए-जाँ से जुदा हुई ख़ुश्बू
सफ़र कुछ ऐसा है अब के कोई मिला तो मिला
हमारे बा'द रिवायत चली मोहब्बत की
निज़ाम-ए-आलम-ए-हस्ती को फ़ल्सफ़ा तो मिला
जो छोड़ आए थे तस्कीन-ए-दिल के वास्ते हम
तुम्हें ऐ जान-ए-तमन्ना वो नक़्श-ए-पा तो मिला
सवाल आ गए आँखों से छन के होंटों पर
हमें जवाब न देने का फ़ाएदा तो मिला
ये आह-ओ-गिर्या-ओ-ज़ारी कहीं तो काम आई
हवा-ए-दश्त को पानी का ज़ाइक़ा तो मिला
नमाज़-ए-अस्र नहीं पढ़ सकी मिरी वहशत
जुनून-ए-इश्क़ को मैदान-ए-कर्बला तो मिला
फिर इस के बा'द बरामद न हो सका कुछ भी
हमारे आँख में जलता हुआ दिया तो मिला
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