चाँद निकला तो तेरी याद आई
By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
चाँद निकला तो तेरी याद आई
दिल को डसने लगी है तन्हाई
दर्द लेता है दिल में अंगड़ाई
फिर उसी बेवफ़ा की याद आई
कैसा सावन है ये तुम्हारे बिन
दिल को भाती नहीं है पुरवाई
वो तसव्वुर में ऐसे आते हैं
दूर बजती हो जैसे शहनाई
तेरा चेहरा कि जैसे झील-कँवल
चाँदनी तुझ को देख शर्माई
दिल को फिर याद आ गई उस की
दर्द लेने लगा है अंगड़ाई
वो न घर आ सके 'वजाहत' के
याद उन की मगर बहुत आई
दिल को डसने लगी है तन्हाई
दर्द लेता है दिल में अंगड़ाई
फिर उसी बेवफ़ा की याद आई
कैसा सावन है ये तुम्हारे बिन
दिल को भाती नहीं है पुरवाई
वो तसव्वुर में ऐसे आते हैं
दूर बजती हो जैसे शहनाई
तेरा चेहरा कि जैसे झील-कँवल
चाँदनी तुझ को देख शर्माई
दिल को फिर याद आ गई उस की
दर्द लेने लगा है अंगड़ाई
वो न घर आ सके 'वजाहत' के
याद उन की मगर बहुत आई
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