छोड़ कर तुझ को कहीं और निकल सकते थे
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
छोड़ कर तुझ को कहीं और निकल सकते थे
ज़िंदगी हम तिरा 'उन्वान बदल सकते थे
मर गए ठीक हुआ ख़त्म कहानी भी हुई
वर्ना इक रोज़ कहानी से निकल सकते थे
आइना होने का नुक़्सान उठाया हम ने
मिट्टी होते तो किसी शक्ल में ढल सकते थे
मौसम-ए-हिज्र तिरा शुक्र बचाया तू ने
वस्ल की आँच से हम वर्ना पिघल सकते थे
ऐसे मौक़े’ तो असीरी में कई बार मिले
हम अगर चाहते ज़ंजीर बदल सकते थे
ज़िंदगी हम तिरा 'उन्वान बदल सकते थे
मर गए ठीक हुआ ख़त्म कहानी भी हुई
वर्ना इक रोज़ कहानी से निकल सकते थे
आइना होने का नुक़्सान उठाया हम ने
मिट्टी होते तो किसी शक्ल में ढल सकते थे
मौसम-ए-हिज्र तिरा शुक्र बचाया तू ने
वस्ल की आँच से हम वर्ना पिघल सकते थे
ऐसे मौक़े’ तो असीरी में कई बार मिले
हम अगर चाहते ज़ंजीर बदल सकते थे
23262 viewsghazal • Hindi