चीख़ें लम्बी हो जाती हैं

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
चीख़ें लम्बी हो जाती हैं
तो ख़ामोशी हो जाती हैं
महँगे सपने मत देखा कर
आँखें ख़ाली हो जाती हैं


शा'इर महँगे हो जाएँ तो
ग़ज़लें सस्ती हो जाती हैं
बर्ग-ओ-बार हरा रखने में
शाख़ें पीली हो जाती हैं


एक दिया रौशन करने में
रातें काली हो जाती हैं
कोई ज़बाँ हो दीवानों में
बातें फिर भी हो जाती हैं


पत्थर-वत्थर भरते रहिए
ग़ज़लें भारी हो जाती हैं
81732 viewsghazalHindi