चूम लो उस हाथ को जो हाथ बिक जाता न हो

By bashir-farooqiJanuary 2, 2024
चूम लो उस हाथ को जो हाथ बिक जाता न हो
वक़्त की सच्चाइयाँ लिखने से घबराता न हो
हादिसा ये है कि मेरी प्यास ने बाँधी है आस
ऐसे बादल से बरसना ही जिसे आता न हो


कोई राही इतना भी बेबस नहीं होता जिसे
कोई आँसू कोई जुगनू राह दिखलाता न हो
इस का इम्काँ है कि इस शहर-ए-सराब-ओ-ख़्वाब में
जिस को पा लेता हो इंसाँ उस को भी पाता न हो


कोई दिन ऐसा नहीं ऐ ख़ूबसूरत ज़िंदगी
जब मिरी आँखों में तेरा रूप लहराता न हो
दिल में अरमाँ ले के चलता हो तो मुमकिन ही नहीं
आदमी शीशे से या पत्थर से टकराता न हो


वो कोई तस्वीर है जिस में न हो रंग-ए-वफ़ा
वो कोई मंज़र है जो आँखों को बहलाता न हो
इक इरादा है जुनूँ है इक सफ़र है ज़िंदगी
हादसों से वो डरे जीना जिसे आता न हो


ऐसे सूरज से तो मिट्टी का दिया अच्छा 'बशीर'
ऐसा सूरज जो किसी आँगन तलक जाता न हो
22884 viewsghazalHindi