दम-ए-रुख़्सत फ़राहम हिज्र का सामान करते हैं

By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
दम-ए-रुख़्सत फ़राहम हिज्र का सामान करते हैं
दिल-ए-हैरत-ज़दा को और भी हैरान करते हैं
उठाएँ किस क़दर एहसाँ करम-फ़रमाइयों का हम
ज़माने-भर में कहते हैं कि वो एहसान करते हैं


नज़र-अंदाज़ करने का गिला उन से नहीं लेकिन
हमें भी देखना है वो किसे मेहमान करते हैं
डराते क्या हो नादानो उन्हें ऊँची 'इमारत से
चटानों का जो सीना चीर कर मैदान करते हैं


वफ़ा की जुस्तुजू में हम किसी वीरान रस्ते पर
मता’-ए-ज़िंदगी का किस क़दर नुक़्सान करते हैं
दरून-ए-ज़ात की पेचीदगी कुछ कम नहीं 'अह्मर'
ज़माने के लिए हम शा'इरी आसान करते हैं


21956 viewsghazalHindi