दानिस्ता कभी ऐसी हिमाक़त नहीं करता

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
दानिस्ता कभी ऐसी हिमाक़त नहीं करता
फ़नकार हूँ तौहीन-ए-मोहब्बत नहीं करता
क्या रास उसे आएगी दस्तार-ए-फ़ज़ीलत
जो अपने उसूलों की हिफ़ाज़त नहीं करता


इस दौर में हम उस को फ़रिश्ता ही कहेंगे
फ़ाक़ों में जो ग़ैरत की तिजारत नहीं करता
तूफ़ान से लड़ने का अगर शौक़ न होता
मैं ‘अज़्मत-ए-साहिल से बग़ावत नहीं करता


शायद है 'अज़ीज़ उस को मिरी मुफ़लिसी 'आलम'
वो मेरे मुक़द्दर की मरम्मत नहीं करता
70840 viewsghazalHindi