दर-अस्ल कर गई हैं दिल में घर तिरी आँखें
By adnan-akhtar-azmiJanuary 1, 2024
दर-अस्ल कर गई हैं दिल में घर तिरी आँखें
हैं मुद्दतों से मिरी हम-सफ़र तिरी आँखें
सुना है लुत्फ़-ओ-‘इनायत है और लोगों पर
हमारे हाल से हैं बे-ख़बर तिरी आँखें
अंधेरे का कोई नाम-ओ-निशान ही न रहे
उधर हो रौशनी देखें जिधर तिरी आँखें
ये और बात कि इज़हार हो नहीं सकता
निगाह-ओ-दिल में बसी हैं मगर तिरी आँखें
मुझे भी तो कई अश'आर शब में कहने थे
परेशाँ करती रहीं रात-भर तिरी आँखें
तसव्वुरात में जारी रहा सफ़र 'अदनान'
जुदा हुईं न किसी मोड़ पर तिरी आँखें
हैं मुद्दतों से मिरी हम-सफ़र तिरी आँखें
सुना है लुत्फ़-ओ-‘इनायत है और लोगों पर
हमारे हाल से हैं बे-ख़बर तिरी आँखें
अंधेरे का कोई नाम-ओ-निशान ही न रहे
उधर हो रौशनी देखें जिधर तिरी आँखें
ये और बात कि इज़हार हो नहीं सकता
निगाह-ओ-दिल में बसी हैं मगर तिरी आँखें
मुझे भी तो कई अश'आर शब में कहने थे
परेशाँ करती रहीं रात-भर तिरी आँखें
तसव्वुरात में जारी रहा सफ़र 'अदनान'
जुदा हुईं न किसी मोड़ पर तिरी आँखें
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