दरारें बाम-ओ-दर की पढ़ रहे हैं
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
दरारें बाम-ओ-दर की पढ़ रहे हैं
किताबें अपने घर की पढ़ रहे हैं
कहानी तो सफ़र की पढ़ रहे हैं
हक़ीक़त रहगुज़र की पढ़ रहे हैं
लबों पर है क़सीदा आसमाँ का
ख़राशें बाल-ओ-पर की पढ़ रहे हैं
बिछा कर अपना चेहरा आइने में
'इबारत उस नज़र की पढ़ रहे हैं
कोई दिन से फ़ज़ाओं में इधर की
नई तहरीर उधर की पढ़ रहे हैं
ग़ुबार-ए-राह में हम जैसे-तैसे
निगाहें राहबर की पढ़ रहे हैं
किताब-ए-दिल के ख़ाली हाशिए पर
'इबारत अपने सर की पढ़ रहे हैं
हमें कैसा मरज़ अच्छा रहेगा
निगाहें चारागर की पढ़ रहे हैं
किताबें अपने घर की पढ़ रहे हैं
कहानी तो सफ़र की पढ़ रहे हैं
हक़ीक़त रहगुज़र की पढ़ रहे हैं
लबों पर है क़सीदा आसमाँ का
ख़राशें बाल-ओ-पर की पढ़ रहे हैं
बिछा कर अपना चेहरा आइने में
'इबारत उस नज़र की पढ़ रहे हैं
कोई दिन से फ़ज़ाओं में इधर की
नई तहरीर उधर की पढ़ रहे हैं
ग़ुबार-ए-राह में हम जैसे-तैसे
निगाहें राहबर की पढ़ रहे हैं
किताब-ए-दिल के ख़ाली हाशिए पर
'इबारत अपने सर की पढ़ रहे हैं
हमें कैसा मरज़ अच्छा रहेगा
निगाहें चारागर की पढ़ रहे हैं
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