दर्द मिले चेहरा खिल जाए
By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
दर्द मिले चेहरा खिल जाए
दिल टूटे आवाज़ न आए
वो लगता है सूरज जैसा
उस से नज़रें कौन मिलाए
ऐसे दोस्त को क्या कहिए जो
दिल में रहे और दिल को जलाए
देर तलक दिल सँभल न पाया
उन से मिल कर हम घबराए
लब सी ले और आँसू पी जा
गो जीना दूभर हो जाए
ग़म दिल में इस तरह छुपा ले
चेहरा कोई पढ़ने न पाए
उस से 'वजाहत' अब क्या मिलना
जिस से मिल कर दिल पछताए
दिल टूटे आवाज़ न आए
वो लगता है सूरज जैसा
उस से नज़रें कौन मिलाए
ऐसे दोस्त को क्या कहिए जो
दिल में रहे और दिल को जलाए
देर तलक दिल सँभल न पाया
उन से मिल कर हम घबराए
लब सी ले और आँसू पी जा
गो जीना दूभर हो जाए
ग़म दिल में इस तरह छुपा ले
चेहरा कोई पढ़ने न पाए
उस से 'वजाहत' अब क्या मिलना
जिस से मिल कर दिल पछताए
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